क्या होती है जैविक कृषि?

TD Desk

उत्तर प्रदेश का कृषि और बागवानी विभाग, जल शक्ति विभाग के साथ मिलकर गंगा के दोनों किनारों पर पांच किलोमीटर के दायरे को जैविक कृषि बेल्ट में बदलने की योजना बना रहा है। योजना के अनुसार, गंगा के दोनों किनारों पर बसे गांवों के किसानों द्वारा रसायनों जैसे उर्वरकों, कीटनाशकों आदि के उपयोग को हतोत्साहित करके जैविक कृषि को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

क्या होती है जैविक कृषि?

पूर्ण रूप से जैविक खादों पर आधारित फसलों का उत्पादन करना जैविक कृषि कहलाता है। जैविक कृषि में रासायनिक उर्वरकों और रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैव उर्वरकों, जैव कीटनाशकों, वर्मीकम्पोस्ट, वानस्पतिक अर्क इत्यादि प्रयोग में लाये जाते है।

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जैव उर्वरक अन्य रासायनिक उर्वरकों से न केवल सस्ता होता है; बल्कि यह पौधों में वृद्धि कारक हॉर्मोन उत्पन्न करते हैं; जिनसे उनकी वृद्धि पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और फसल में मृदाजन्य रोग नहीं होते हैं।

भारत में जैविक कृषि से जुड़े महत्वपूर्ण बिन्दु

जैविक खेती अपनाने में किसानों की सहायता करने और प्रीमियम मूल्‍यों की बदौलत पारिश्रमिक बढ़़ाने के उद्देश्‍य से दो विशेष कार्यक्रम, जैविक मूल्य श्रृंखला विकास (एमओवीसीडी) और परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) को वर्ष 2015 में शुरू किया गया था।

  • भारत जैविक खेती करने वाले किसानों की कुल संख्या के मामले में पहले स्थान पर आता है; और जैविक खेती के तहत कुल रकबे की दृष्टि से नौवें स्‍थान पर है।
  • सिक्किम पूरी तरह से जैविक खेती को अपनाने वाला दुनिया का पहला राज्य बन गया है।
  • भारत से जैविक निर्यात मुख्‍यत: अलसी के बीज, तिल, सोयाबीन, चाय, औषधीय पौधों, चावल और दालों का होता रहा है; जो वर्ष 2018-19 में हुए 5151 करोड़ रुपये के कुल जैविक निर्यात किया गया था।

जैविक खेती में बढ़ावा देने का उद्देश्य

सरकार देश और साथ ही विदेशों में जैविक उत्पादों की मांग को देखते हुए जैविक खेती को आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। उत्तर प्रदेश की सरकार जैविक खेती संवर्धन योजना के माध्यम से एक साथ तीन प्रमुख लक्ष्यों पर काम कर रही है।

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  • पहला लक्ष्य गंगा की स्वच्छता और संरक्षण;
  • दूसरा किसानों की आय बढ़ाना और
  • तीसरा राज्य में बड़ी मात्रा में जैविक फसलों का उत्पादन करना है।

इसके लिए आर्गेनिक फार्मिंग कॉरिडोर योजना के तहत किसानों को रियायती मूल्य पर आवश्यक उपकरण प्रदान किए जाएंगे; साथ ही इसके लिए प्रशिक्षण और जानकारी भी दी जाएगी। विभाग इस योजना के लिए जैविक फसलों, उत्पादों की पहचान करने और विशेष बाजार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी कार्य कर रहा हैं।

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