भारत में महिला आंदोलन

TD Desk

अब महिलाओं और लड़कियों को पढ़ने का और स्कूल जाने का अधिकार है। अन्य क्षेत्र भी हैं- जैसे कानूनी सुधार, हिंसा और स्वास्थ्य, जहाँ लड़कियों और महिलाओं की स्थिति बेहतर हुई है। ये परिवर्तन अपने-आप नहीं आए हैं; औरतों ने व्यक्तिगत स्तर पर और आपस में मिल कर इन परिवर्तनों के लिए संघर्ष किए हैं; इन संघर्षों को महिला आंदोलन कहा जाता है।

देश के विभिन्न भागों से कई औरतें और कई महिला संगठन इस आदोलन के हिस्से हैं; कई पुरुष भी महिला आदोलन का समर्थन करते हैं। इस आंदोलन में जुटे लोगों की मेहनत, निष्ठा और उनकी विशेषताएँ इसे एक बहुत ही जीवंत आंदोलन बनाती हैं। इसमें चेतना जागृत करने, भेदभावों का मुकाबला करने और न्याय हासिल करने के लिए भिन्न-भिन्न रणनीतियों का उपयोग किया गया है।

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महिला आंदोलन अभियान

भेदभाव और हिंसा के विरोध में अभियान चलाना महिला आंदोलन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है; अभियानों के फलस्वरूप नए कानून भी बने हैं।

  • सन् 2006 में एक कानून बना है; जिससे घर के अंदर शारीरिक और मानसिक हिंसा को भोग रही औरतों को कानूनी सुरक्षा दी जा सके।
  • इसी तरह महिला आंदोलन के अभियानों के कारण 1997 में सर्वोच्च न्यायालय ने कार्य के स्थान पर और शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं के साथ होने वाली यौन प्रताड़ना से उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए।
  • 1980 के दशक में देश भर के महिला संगठनों ने दहेज हत्याओं के खिलाफ़ आवाज़ उठाई।

नवविवाहित युवतियों को उनके पति और ससुराल के लोगों द्वारा दहेज के लालच में मौत के घाट उतार दिया जाता था। महिला संगठनों ने इस बात की कड़ी आलोचना करी कि कानून अपराधियों का कुछ नहीं कर पा रहा है। इस मुद्दे पर महिलाएं सड़कों पर निकल आई। उन्होंने आदलत के दरवाजे खटखटाए और आपस में अनुभव व जानकारियों का आदान-प्रदान किया। अंततः यह समाज का एक बड़ा सार्वजनिक मुद्दा बन गया और अखबारों में छाने लगा। दहेज से संबंधित कानून को बदला गया; ताकि दहेज मांगने वाले परिवारों को दंडित किया जा सके।

महिला आंदोलन के अभियानों में प्रमुख कार्य

जागरूकता बढ़ाना

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औरतों के अधिकारों के संबंधों में समाज में जागरूकता बढ़ाना भी महिला आंदोलन का एक प्रमुख कार्य है। गीतों, नुक्कड़ नाटकों व जनसभाओं के माध्यम से वह अपने संदेश लोगों के बीच पहुँचाता है।

विरोध करना

जब महिलाओं के हितों का उल्लंघन होता है; जैसे किसी कानून, अथवा निति द्वारा, तो महिला आंदोलन ऐसे उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाता है; लोगो को घ्यान खींचने के लिए रैलियाँ, प्रदर्शन आदि बहुत असरकारक तरीके है।

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बन्धुत्व व्यक्त करना

न्याय के अन्य मुद्दों व औरतों के साथ बन्धुत्व व्यक्त करना भी महिला आंदोलन का ही हिस्सा है।

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8 मार्च, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को दुनियाभर की औरतें अपने संघर्षों को ताजा करने और जश्न मनाने के लिए इकट्ठी होती है।

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