चंगेज़ खान: 4 करोड़ लोगों को मौत के घाट उतारने वाला शख्श

TD Desk

क्रूर,बर्बरता,कठोर,निडर,और निर्दयी ऐसा कोई भी शव्द नही जो इस शासक के लिए अनुचित नही होगा। इतिहास आज भी उसे एक अत्याचारी शासक के रूप में ही जानते है। ऐसा कहा जाता है कि वह जहाँ भी जाता था उस जगह को तबाह कर देता था और पीछे बर्बादी छोड़ जाता था, इसका नाम सुनते है बड़े बड़े राजाओं के पसीने छूट जाते थे। अपनी क्रूरता के लिए पहचाने जाने वाले यह शासक कोई और नही बल्कि चंगेज़ खान है। कहते है चंगेज़ खान बचपन से ही निडर, कठोर और साहसी था। इतिहासकारों के अनुसार यह इतना क्रूर शासक था कि कहा जाता है ये जिस राज्य में जाता वह की आबादी आधे से भी कम हो जाती थी। तो चलिए जानते है इस क्रूर शासक के जीवन, युद्ध कौशल और 4 करोड़ लोगों को मौत के घाट उतारने वाला चंगेज़ खान से जुड़ी 10 बातें :-

चंगेज़ खान
चंगेज़ खान
1. चंगेज़ खान का जन्म और बचपन

चंगेज़ खान का जन्म सन ११६२ के आसपास मंगोलिया के उत्तरी भाग में एक खानाबदोश काबिले में हुआ था जो ओनोन नदी के निकट था।  

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कहा जाता है कि चंगेज़ खान की दांयी हथेली पर पैदाइशी खूनी धब्बा था।

चंगेज खान के  पिता का नाम येसूजेई बगातुर था, जो कि कियात कबीले के सरदार थे। उसके तीन सगे भाई व एक सगी बहन थी और दो सौतेले भाई भी थे। जब चंगेज़ मात्र 10 साल का था तभी कबीलों की लड़ाई में उसके पिता येसूजेई बगातुर की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद वह हिमम्मत नहीं हारा बल्कि पिता की मौत के बाद उसके अंदर का सारा खौफ खत्म हो गया और वह निडर तरीके से आगे बढ़ता चला गया।

चंगेज़ खान बचपन से ही बहुत गुस्सैल था कहा जाता है कि एक बार उसके छोटे भाई ने उसकी मछली चोरी करके खा ली l चंगेज़ खान को जब इस बात का पता लगा तो उसने गुस्से मे आकर अपने छोटे भाई को मार डाला था l

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धीरे-धीरे उसने अपनी मजबूत संगठन शक्ति के बल पर खानाबदोश समुदायों को इकट्ठा किया और एक बड़ी शक्ति के रुप में उभरा।

2. चंगेज खान का नाम और मजहब

खान नाम के साथ सुनते है हमें लगता है कि वह एक मुग़ल सम्राट रहा है जबकि ऐसा बिलकुल नही है।  

चंगेज़ खान का असली नाम तेमुजिन था।

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चंगेज़ नाम उसे कई राज जीतने के बाद मिला था,और उसके आधीन में एक बहुत बड़ा क्षेत्र आ गया था, चंगेज़ शब्द का अर्थ होता है विश्व का समद्र।  

चंगेज का मजहबों के प्रति रवैया एक जैसा था।  उसकी सेना में बौद्ध, मुसलमान सब धर्मों को मानने वाले थे।  उसने किसी एक महज़ब को नहीं अपनाया।  चंगेज शमिनिस्म धर्म का अनुयायी था।  यह धर्म मंगोलिया, साइबेरिया आदि इलाकों में प्रचलित है।

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चंगेज़ को बाज़ पालने का शौक था। उसके पास तक़रीबन 800 बाज थे।

3. कई कबीलों को अपने अधीन कर की विजय अभियानों की शुरुआत

12 वर्ष की आयु में तिमुजिन की शादी बोर्ते के साथ हुई थी। वहीं शादी के कुछ समय बाद ही उसकी बीबी का एक विद्रोही कबीले द्धारा अपहरण कर लिया गया था, जिसे छुड़ाने के लिए चंगेज खान को काफी संघर्ष और लड़ाईयां करनी पड़ी थी।

इन विकट परिस्थितियों में भी वो दोस्त बनाने में सक्षम रहा।

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उसका सगा भाई जमूका भी उसका एक विश्वसनीय साथी था। लेकिन बाद में बाद में वो शत्रु बन गया। जमूका को हराने के बाद उसमें बहुत आत्मविश्वास आ गया और वो अन्य कबीलों के खिलाफ़ युद्ध के लिए निकल पड़ा।

सन 1206 तक तेमुजिन, जमूका और नेमन लोगों को निर्णायक रूप से परास्त करने के बाद स्टेपी क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली व्य़क्ति बन गया। 

4. जीता था 3 करोड़ 30 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र

उसके बाद चंगेज़ खान ने 1206 से 1227 के बीच दुनिया के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया जिसका क्षेत्रफल 3 करोड़ 30 लाख वर्ग किलोमीटर था। हम यूँ कह सकते है कि पूरा पृथ्वी का 22% है और भारत का क्षेत्रफल से 10 गुना ज्यादा हिस्से को अपने कब्जे में कर चूका था।

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इनका साम्राज्य चीन, अमू दरिया, तुरान,रूस, ईरान, इराक से लेकर बुल्गारिया व हंगरी तक फैला हुआ था। आज तक इतिहास में इतने बड़े सम्राट कोई भी नही बन पाया है।

5. चंगेज खान का सैन्य-युद्ध कौशल और सफलता का रहस्य

दुनिया का सबसे क्रूर सेनापति चंगेज़ खान अपने युद्ध कौशल के लिए जाना जाता था, वो जिस राज्य में भी अपना सम्राज्य स्थापित करना चाहता था, अद्भुत युद्ध कौशल की वजह वो उसे जीत लेता था।

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चंगेज़ खान ने अपने सैनिको को काफ़ी युद्ध कुशल बना रखा था l उसके पास उस समय एक विशाल सेना थी l उसने घोड़ो को तरह तैयार किया हुआ था की एक घोड़े के मरने के बाद दूसरा घोड़ा अपने आप उसकी जगह ले लेता था l जिससे उसकी सेना का बल बना रहता था l चंगेज़ खान की सेना काफ़ी अनुसाशन मे रहती थी और इसी वजह से वह हर बार जीत जाता था l

इसके अलवा उसके बेहतरीन घुड़सवार, युद्ध में आग के गोलों के इस्तेमाल से भी उसकी सफलता की राहें आसान हो गईं।

अपनी क्रूरता के लिए मशहूर मंगोल शासक चंगेज खान ने कई ऐसी लड़ाईयां भी लड़ीं जिसमें उसका सैन्य बल, विरोधी की सेना से कम था, लेकिन उसके बेहतरीन संगठन शक्ति और अनुशासन की वजह से चंगेज खान की सेना की ही ज्यादातर जीत होती थी।

6. चार करोड़ से ज्यादा लोगों को मौत का जिम्मेदार था चंगेज़ खान

अपनी विजयी अभियानों के दौरान वह जिस भी क्षेत्र में जाता वहाँ शहर के शहर के तबाह कर देता था। बर्बरतापूर्वक मासूम बच्चों, युवाओं और महिलाओं को जान से मार देता था। इतिहास में उसकी क्रूरता के किस्से रौंगटे खड़े कर देने वाले हैं।

सन 1219 को ईरान में अपने विजय अभियान के दौरान उसने वहां की करीब 75 फीसदी आबादी की जान ले ली थी।

उज्बेकिस्तान के सबसे बड़े शहर बुखारा और समरकंद को जला दिया था, वहीं उसके इस कुकर्म से हजारों लोग जिंदा ही जलकर राख में मिल गए थे। बुखारा की 10 लाख आबादी में से सिर्फ 50 हज़ार लोग ही जिंदा बचे थे।

जब इसने चीन के राजधानी बीजिंग पर कब्ज़ा किया था तो उसके बाद चीन की जनसँख्या में भी भारी गिरावट आई थी।

7. भारत को रौंदना चाहता था चंगेज खान
चंगेज़ खान
चंगेज़ खान

इन युद्ध के बाद चंगेज़ खान की नज़रे भारत के ख़ज़ाने पर थी और वह इसे हर कीमत मे पाना चाहता था और दूसरी तरफ ईरान में ख्वारिज्म वंश के जिस शासक पर आक्रमण किया था, तब उसका उत्तराधिकारी जलालुद्दीन मंगवर्नी इसके भय से वह सिंध नदी के तट पर पहुंच गया था।

दिल्ली के तल्ख पर विराजित सुल्तान इल्तुतमिश से सहायता मांगी, लेकिन चंगेज खान से भय से इल्तुतमिश ने जलालुद्धीन को सहायता देने से मना कर दिया था।

इतिहासकारों के मुताबिक चंगेज़ खान पहले भारत को रौंदते हुए असम के रास्ते मंगोलिया वापस जाना चाहता था, लेकिन इल्तुततमिश के हार मानने और भीषण गर्मी और अपनी बीमारी की वजह से वह भारत आते-आते वापस लौट गया।

और इस तरह भारत दुर्दान्त चंगेज खान की बर्बरता और भयानक बर्बादी से बच गया।

8. चंगेज खान की मृत्यु – Genghis Khan Death

किसी को नही पता कि चंगेज़ खान कि मृत्यु कैसे हुई और उसे कहा दफनाया गया। कहा जाता है कि उसके शव को दफनाने गए सभी सैनिकों को मार दिया गया गया था।

कुछ इतिहासकारों के अनुसार घोड़े से गिरने की वजह से उसकी मृत्यु हो गयी।

चंगेज़ खान की मौत सन 1227 में 65 साल की उम्र में अपना पूरा साम्राज्य पीछे छोड़ कर चले गये

9. चंगेज़ खान का उत्तराधिकारी

चंगेज़ खान की मौत के बाद उसका बेटा ओगताई उसका उत्तराधिकारी बना, जो कि चंगेज खान के विपरीत एक शांतिप्रिय और दयालु शासक था। वहीं उसकी मौत के 200 सालों बाद भी मंगोल साम्राज्य का शासन रहा।

10. चंगेज़ खान पर लिखी गयी हुई कुछ किताबें

ग्लिंप्सेज ऑफ़ वर्ल्ड हिस्ट्री

चंगेज खान : शैतान का बेटा

सीक्रेट ऑफ़ मंगोल लाइफ

जंग की तैंतीस रणनीतियां

अ सीक्रेट हिस्ट्री ऑफ़ मंगोल

निष्कर्ष

इस तरह चंगेज खान इतिहास में सबसे जालिम, क्रूर और निर्दयी शासक के रुप में मशहूर हुआ जिसने दुनिया के कई हिस्सों में बर्बरतापूर्ण अपना सम्राज्य स्थापित किया था।  लेकिन अगर देखा जाये तो आज तो जिस सम्राट ने भी कही आक्रमण किया तो हर एक ने क्रूर और निर्दयी शासक का परिचय दिया है।

इसमें गौर करनी वाली बात है कि चन्द्रगुप्त, सिकंदर और अकबर जैसे राजाओं में प्रदेश जितने का काम जवानी में किया वही चंगेज़ खान ने 42 वर्ष की आयु में अपने विजयी अभियान की शुरुवात की थी।  इससे हम कह सकते है चंगेज़ खान अगर जालिम, क्रूर और निर्दयी था तो इसके साथ-साथ युद्ध कुशलता,समझदारी,अनुशासन,काम के प्रति ईमानदारी, निष्ठा , मजबूत संगठन शक्ति और अधेर उम्र का होशियार और सावधान आदमी भी था।  और वह अपनी जंग जोश में भी बल्कि बुद्धि और विवेक का उपयोग कर जीतता था।

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