क्या होती है क्वांटम कंप्यूटिंग, लाभ व चुनौतियाँ

TD Desk

क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum computing): वर्तमान में विश्व में जितने भी सुपर कम्प्यूटर हैं; वो सभी अन्य सामान्य पर्सनल कम्प्यूटर की तुलना में लाखों गुना तेज गणना एवं डाटा की प्रोसेसिंग करते हैं; सामान्य कम्प्यूटर में एक प्रोसेसर होता है; जबकि सुपर कम्प्यूटर में अनगिनत प्रोसेसर होते हैं; जो गणना व डाटा विश्लेषण की गति को बढ़ा देते हैं। लेकिन विडम्बना है कि सामान्य कम्प्यूटर और सुपर कम्प्यूटर दोनों एक ही तकनीक पर कार्य करते हैं अर्थात् परम्परागत बाइनरी डिजिट पर आधारित तकनीक पर ये कार्य करते हैं। दूसरी तरफ क्वाण्टम कम्प्यूटर, क्वाण्टम कम्प्यूटिंग पर आधारित है जो क्वाण्टम फिजिक्स के सिद्धांतों के अनुसार कार्य करती है। अतः यदि क्वाण्टम कम्प्यूटिंग का उपयोग करके सशक्त सुपर क्वाण्टम कम्प्यूटर बनाये गये तो ‘सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी’ एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भविष्य बदल जायेगा।

क्या होती है क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum computing)?

क्वाण्टम कम्प्यूटिंग एक वृहद संकल्पना या प्रौद्योगिकी है, जिस पर क्वाण्टम कम्प्यूटर आधारित होते हैं। क्वाण्टम कम्प्यूटर, क्यूबिट्स (Qubits) अर्थात् क्वाण्टम बिट्स पर आधारित होते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो क्वाण्टम कम्प्यूटर क्यूबिट्स के माध्यम से गणना, डाटा संग्रहण एवं उसका विश्लेषण आदि करते हैं। क्यूबिट्स में पारम्परिक डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर की भाँति दो ही बाइनरी डिजिट (0 और 1) होते हैं किन्तु क्यूबिट्स एक ही समय में 0 या 1 अथवा 0 और 1 के संयुक्त रूप में उपस्थित हो सकता है।

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  • क्यूबिट, क्वाण्टम भौतिकी के दो प्रमुख सिद्धांतों पर कार्य करते हैं-
  • सुपरपोजिशन (Superposition)
    •  सुपरपोजिशन का अर्थ है; कि प्रत्येक क्यूबिट एक ही समय में 1 और 0 दोनों को दर्शा (Represent) सकता है।
  • एनटैगलमेंट (Entanglement) ।
    • एनटैंगलमेंट का अर्थ है कि सुपरपोजिशन की अवस्था में क्यूबिट्स एक-दूसरे के साथ सहसंबद्ध हो सकते हैं; अर्थात् एक स्थिति (चाहे वह 1 हो या 0) दूसरे की स्थिति पर निर्भर कर सकती है।

इसका तात्पर्य यह हुआ कि क्यूबिट आपस में एक-दूसरे से जुड़े हैं; यदि एक पर कार्य किया जाता है तो दूसरा इससे प्रभावित होता है; यहाँ तक कि यह प्रभाव तब भी होता है जब वे काफी अधिक दूरी पर होते हैं। एक क्वाण्टम कम्प्यूटर की कम्प्यूटिंग पावर में क्यूबिट्स बढ़ने के साथ-साथ चरघातांकी वृद्धि होती है।

क्वाण्टम कम्प्यूटिंग के लाभ

  • क्वाण्टम कम्प्यूटिंग में घटित होने वाली दो प्रमुख घटनाएँ ‘सुपरपोजिशन और एनटैगलमेंट’ क्यूबिट्स के के द्वारा चंद पलों में बड़ी से बड़ी एवं जटिल से जटिल गणितीय समस्याओं को हल किया जा सकता है।
  • इस कम्प्यूटिंग में क्वाण्टम फिजिक्स के सिद्धांतों का भी पालन होता है जिससे छोटे-छोटे ट्रांजिस्टरों (अणु के आकार) का निर्माण होगा जो न सिर्फ ऊर्जा की बचत को बढ़ायेंगे बल्कि क्वाण्टम कम्प्यूटर के आकार को भी छोटा करेंगे।
  • क्वाण्टम कम्प्यूटर में सूचनाओं या डाटा का सुरक्षित तरीके से ‘एन्क्रिप्शन’ (Encryption) होता है। इसमें हैकिंग जैसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। कुछ वैज्ञानिक क्वाण्टम कम्प्यूटर को पूर्ण रूप से सुरक्षित कम्प्यूटर मान रहे हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि भविष्य में संवेदनशील सूचनाओं को सुरक्षित रखने या उन्हें पढ़ने में क्वाण्टम कम्प्यूटिंग बहुत मददगार होगी तथा वैज्ञानिकों के लिए क्वाण्टम कम्प्यूटरों के विविध उपयोग संभव हैं।
  • क्वाण्टम कम्प्यूटिंग के उपयोग से नयी-नयी खगोलीय जानकारी जुटाई जा सकती है। उपग्रहों एवं अन्य स्पेस मिशन से प्राप्त डाटा को क्वाण्टम कम्प्यूटर बेहतर तरीके से विश्लेषित करके ब्रह्माण्ड के रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं। इससे ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, ब्रह्मांड का फैलाव, खगोलीय पिण्डों में मौजूद संसाधन इत्यादि के बारे में पता चल सकेगा। इस प्रकार स्पष्ट है; कि अंतरिक्ष अन्वेषण में क्वाण्टम कम्प्यूटिंग का उपयोग कर अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं।
  • इस कम्प्यूटिंग से युक्त कम्प्यूटरों को किसी भी मौसम में आसानी से उपयोग किया जा सकता है; अर्थात् क्वाण्टम कम्प्यूटर मौसमी पहलुओं से अप्रभावित रहते हैं।
  • क्वाण्टम कप्यूटर का अनुप्रयोग चिकित्सा क्षेत्र में भी है; इसके अलावा, इनका उपयोग सप्लाई चेन मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक, वित्तीय सेवाओं, संसाधनों की मॉनीटरिंग इत्यादि में बखूबी रूप से हो सकता है।

क्वाण्टम कम्प्यूटिंग की चुनौतियाँ

क्यूबिट को संभालना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती है; क्योंकि उनका जीवन काल अल्पकालिक होता है।सूचनाओं के हिफाजत के लिए जिन एनक्रिप्शन टूल्स का इस्तेमाल होता है; उनमें ‘आरएसए’ भी शामिल है; जो सबसे मजबूत कवच माना जाता है; लेकिन क्वाण्टम कम्प्यूटर इसे भी भेद सकता है।

  • क्वाण्टम टेक्नोलॉजी किसी भी देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है;। इससे दूसरे देशों की गोपनीय सूचनाओं में सेंध लगने का खतरा भी बढ़ सकता है।
  • क्वाण्टम कम्प्यूटिंग के विकास हेतु भारत में आधारभूत ढाँचा एवं वैज्ञानिकों का अभाव है; जो इस क्षेत्र में एक बड़ी बाधा के रूप में है।

अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) एक ऐसा क्वाण्टम कम्प्यूटर बनाना चाहती है; जो दुनियाभर के कम्प्यूटरों में रखे बैंकिंग, मेडिकल, व्यापारिक और अन्य सरकारी रिकॉडों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हर तरह के एनक्रिप्शन को भेद सके।

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